मनात जे येते ते लिहिते त्यात कुठला प्रकार आहे ते हि मला माहित नाही
ख्वाब...
ख्वाब बचपन में रंगीन हुआ करते थे
जवानी में वही हसीन हो गये,
बुढापा आते ही धुंधले से हो गये!
अर्चना...
मौसम....
बिन मौसम कि बारिश,
सब जगह खुशियाँ छायी
पर
मेरे आँखोमें नमी सी छोड गयी!
अर्चना.
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